Basant Panchmi 2025 Shahi Snan: बसंत पंचमी हिंदू धर्म में एक खास त्योहार है, जो वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक होता है। इस दिन विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। 2025 में यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस साल महाकुंभ के तीसरे अमृत स्नान का आयोजन इसी दिन होने जा रहा है। इस पवित्र स्नान का विशेष महत्त्व होता है और लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेकर पुण्य अर्जित करते हैं। आइए, जानते हैं इस खास अवसर के बारे में विस्तार से।
बसंत पंचमी का महत्त्व (Basant Panchmi 2025 Shahi Snan)
बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का त्योहार है, जो हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन को खासतौर पर देवी सरस्वती की पूजा के लिए जाना जाता है, जो विद्या, कला और संगीत की देवी मानी जाती हैं। इस दिन लोग पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं और देवी सरस्वती की पूजा करके अपने जीवन में ज्ञान और विद्या की कामना करते हैं।
वसंत पंचमी को ‘सरस्वती पूजन दिवस’ भी कहा जाता है। इस दिन खासतौर पर छात्र और विद्या के क्षेत्र में कार्यरत लोग मां सरस्वती से बुद्धि और ज्ञान की प्रार्थना करते हैं। इसके अलावा, कई जगहों पर इस दिन पतंगबाजी का आयोजन भी किया जाता है, जो उत्साह और खुशी का प्रतीक है।
महाकुंभ 2025 का तीसरा अमृत स्नान
2025 का महाकुंभ भी इस साल का एक विशेष आकर्षण है। महाकुंभ हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जो हर 12 साल बाद चार पवित्र स्थानों – प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में होता है। 2025 में महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज में हो रहा है, जहां लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम (गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती) में स्नान करने के लिए जुटेंगे।

महाकुंभ में कुल चार अमृत स्नान होते हैं, जिनमें से तीसरा अमृत स्नान बसंत पंचमी के दिन होगा। इस स्नान का धार्मिक महत्त्व बहुत अधिक है, क्योंकि मान्यता है कि अमृत स्नान के दिन पवित्र नदी में डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
तीसरे अमृत स्नान का शुभ मुहूर्त
महाकुंभ के तीसरे अमृत स्नान का शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी 2025 के दिन होगा। इस पवित्र स्नान का समय सुबह से लेकर शाम तक रहेगा, और इस दौरान लाखों श्रद्धालु स्नान करेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष फल मिलता है।
2025 में बसंत पंचमी का दिन विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन अमृत स्नान का योग बन रहा है। अमृत स्नान के दौरान पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन पवित्र स्नान के साथ-साथ दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्त्व होता है।

अमृत स्नान का धार्मिक महत्त्व
अमृत स्नान का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। मान्यता है कि जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तो उस समय अमृत कलश की प्राप्ति हुई थी। इसी अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों में संघर्ष हुआ, और अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिर गईं – प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। इन्हीं चार स्थानों पर कुंभ मेले का आयोजन होता है।
अमृत स्नान के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, इस दिन दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।






